पाकिस्तानी खुश हुए, सैम…! – प्रशांत पोळ

२३ मार्च पाकिस्तान के लिए बडा ‘पाक’ दिवस हैं. इसी दिन, सन १९४० में लाहौर में, रावी के तट पर मुस्लिम लीग के अधिवेशन में पहली बार ‘पाकिस्तान’ का प्रस्ताव पारित हुआ था. इसी दिन, सन १९५६ में, पाकिस्तान ने अपना संविधान लागू किया था. इसीलिए २३ मार्च, पाकिस्तान में हर्षोल्लास का दिवस होता हैं. पूरा देश छुट्टी मनाता हैं.

आज पाकिस्तानियों को राहुल गाँधी के गुरु, सैम ने खुश कर दिया. सैम पित्रोदा ने तय करके आज ही का दिन चुना.* पाकिस्तान को उन्होंने क्लीन चिट दी. आतंकवादियों के हमले का पाकिस्तान से कोई सरोकार नहीं हैं, ये बड़े फख्र के साथ कहा. बालाकोट के हमले का सबूत मांगा. आतंकवादी हमले का जवाब सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक नहीं हैं, ऐसा भी कहा. और जाते जाते मोदी जी को हिटलर भी बोल दिया… और क्या चाहिए पाकिस्तान को खुश करने के लिए..? उनके तो बल्ले बल्ले हो गए. आज २३ मार्च का दिन, पाकिस्तान में कुछ ज्यादा ही जोश में मनाया गया. सैम पित्रोदा और राहुल गाँधी के जयकारे लगे. पाकिस्तानी टी वी पर चर्चा में, पुनः एक बार भारत के चुनाव में कांग्रेस के जीतने के लिए दुवाएं दी गयी.

सैम पित्रोदा, कांग्रेस की ओवरसीज विंग के अध्यक्ष हैं. राहुल गाँधी के फ्रेंड-फिलोसोफर-गाइड हैं. राहुल के भाषण उन्ही के टीम के लोग लिख कर देते हैं. ऐसे सैम ने तय करके आज ही के दिन ये वक्तव्य दिया. *उनका गणित साफ़ हैं. वे भारत के मुसलमानों के वोटों को कंसोलिडेट करने का प्रयास कर रहे हैं.*

कांग्रेस की यह रणनीति पुरानी हैं. याद हैं, दिग्विजय सिंह का ‘ओसामा जी’ और ‘लादेन जी’ वाला वक्तव्य..? असम विधानसभा के चुनाव थे. दिग्विजय सिंह इस चुनाव में कांग्रेस के असम के प्रभारी थे. उन्होंने एक सर्वे किया था. जिसमे एक प्रश्न था, ‘आपका आदर्श राजनीतिक व्यक्ति कौन हैं..?’ असम के अधिकतर बंगलादेशी मुसलमानों ने इस प्रश्न का उत्तर ‘ओसामा बिन लादेन’ लिखा था. दिग्गी राजा के लिए इतनी हिंट काफी थी. उन्होंने चुनाव के समय, तय करके वाराणसी की पत्रकार वार्ता में ओसामा बिन लादेन को ‘ओसामा जी’ कहा. पत्रकारों को लगा होगा, ‘जबान फिसल गयी’. इसलिए उन्होंने इस ‘जी’ की ओर ध्यान नहीं दिया. दिग्गी राजा चिंतित हो गए. उनका प्लान फेल हो रहा था. उन्होंने फिर से बिना किसी सन्दर्भ के, ‘ओसामा बिन लादेन’ का ‘लादेन जी’ कर के उल्लेख किया. अब पत्रकार चौकन्ने हो गए. दुसरे दिन, सबसे बड़ी खबर इसी ‘जी’ की थी. असम के सारे समाचार पत्रों ने इस खबर को प्रमुखता से लिया था.

दिग्विजय सिंह की रणनीति सफल हुई. असम में बदरुद्दीन अजमल की ‘यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ यह मुसलमानों की पार्टी होने की बाद भी कांग्रेस को मुस्लिमों का तगड़ा समर्थन मिला. कांग्रेस को असम विधानसभा में पूर्ण बहुमत मिला..!

यही घिसी-पिटी रणनीति अपनाने का प्रयास सैम पित्रोदा ने किया हैं. अब ये तो भारत के मुसलमानों को तय करना हैं, की पाकिस्तानी मुसलमानों को खुश करने का मतलब भारत के मुसलमानों का खुश होना होता हैं क्या..? सैम को मैं बहुत पहले से जानता हूँ. सन १९८६ – ८७ में बंगलोर में सी-डॉट में उनके साथ मैंने काम किया हैं. सैम कभी हम टेलिकॉम इंजिनियर्स के आइडल हुआ करते थे.

उन्ही सैम पित्रोदा पर आज सारा देश क्रोधित हैं. उन्हें गालियों से नवाजा जा रहा हैं. सैम पित्रोदा ने हमारी सेना का अपमान किया हैं. सेना की आवश्यकता को, सेना की कुशलता को, सेना के समर्पण को नकारा हैं. हमारे दुश्मन देश को सारे आरोपों से मुक्त किया हैं. आतंकवादी घटनाओं को सामान्य कहा हैं.

सैम पित्रोदा, मेरे जैसे सामान्य देशवासी की दृष्टि में आप ने देशद्रोह किया हैं..!

आप जिस कांग्रेस के और कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी के मेंटर हैं, उनकी भी यही राय होगी, ऐसा हम मानते हैं…

देश के साथ की गयी इस गद्दारी पर आपको और आपकी कांग्रेस पार्टी को ये देश कभी माफ़ नहीं करेगा..!!
– प्रशांत पोळ

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